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नए हाई पर सेंसेक्स-निफ्टी बंद, मिडकैप इंडेक्स में रिकॉर्ड उछाल, 2.50 लाख करोड़ बढ़ गई निवेशकों की संपत्ति

भारतीय शेयर बाजार में रोज नए रिकॉर्ड बन रहे और इसका सिलसिला गुरुवार 13 जून के कारोबारी सत्र में भी जारी रहा. सुबह के सत्र में बाजार ऐतिहासिक हाई पर खुला तो कारोबार बंद होने के समय सेंसेक्स और निफ्टी ऐतिहासिक हाई पर क्लोज हुआ है. मिडतैप स्टॉक्स में खरीदारी के चलते निफ्टी का मिडकैप इंडेक्स भी रिकॉर्ड हाई पर क्लोज हुआ है.

भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप नए हाई पर क्लोज हुआ है. आज का कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 204 अंकों की उछाल के साथ 76,810 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76 अंकों की उछाल के साथ 23,398 अंकों पर क्लोज हुआ है. 

रिकॉर्ड हाई पर बाजार का मार्केट कैप 

भारतीय शेयर बाजार में तेजी खौसतार से मिडकैप स्टॉक्स में खरीदारी के चलते बीएसई पर लिस्टेड स्टॉक्स का मार्केट कैप आज के सत्र में फिर से नए हाई पर क्लोज हुआ है. बीएसई का मार्केट कैप 431.82 लाख करोड़ रुपये पर क्लोज हुआ है जो पिछले सत्र में 429.32 लाख करोड़ रुपये पर क्लोज हुआ था. आज के सत्र में निवेशकों की संपत्ति में 2.50 लाख करोड़ रुपये का उछाल देखने को मिला है.  

सेक्टर का हाल 

आज के कारोबार में कंज्यूमर ड्यबरेूल्स, आईटी, ऑटोऑयल एँड गैस, हेल्थकेयर, फार्मा, रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली है. हालांकि एफएमसीजी, बैंकिंग, एनर्जी और मीडिया स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है. मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में फिर जोरदार खऱीदारी रही. निफ्टी का मिडकैप इंडेक्स 426 अंकों के उछाल के साथ 54,652 अंकों के नए हाई पर क्लोज हुआ है. निफ्टी का स्मॉल कैप भी शानदार उछाल के साथ क्लोज हुआ है. सेंसेक्स के 30 शेयरों में 20 स्टॉक्स हरे निशान में तो 10 लाल निशान में क्लोज हुए. आज 3984 स्टॉक्स की ट्रेडिंग हुई जिसमें 2355 स्टॉक्स तेजी के साथ और 1534 शेयर गिरकर बंद हुए.

चढ़ने – गिरने वाले शेयर्स 

आज एमएंडएम 2.73 फीसदी, टाइटन 2.68 फीसदी, एल एंट डी 2.06 फीसदी, इंडसइंड बैंक 1.59 फीसदी, टेक महिंद्रा 1.32 फीसदी, टीसीएस 1.18 फीसदी के उछाल के साथ बंद हुआ है. जबकि एचयूएल 1.55 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 1.10 फीसदी, एक्सिस बैंक 0.99 फीसदी, पावर ग्रिड 0.99 फीसदी की गिरावट के साथ क्लोज हुआ है.   

WPI Inflation: थोक महंगाई दर 15 महीने की ऊंचाई पर, मई में बढ़कर हुई 2.61 फीसदी

देश में थोक महंगाई दर के आंकड़े में इजाफा देखा गया है और ये 15 महीने की ऊंचाई पर आ गई है. मई 2024 में थोक महंगाई दर 2.61 फीसदी पर आई है जबकि इससे पिछले महीने यानी अप्रैल 2024 में थोक महंगाई दर 1.26 फीसदी पर रही थी. वही एक साल पहले की समान अवधि यानी मई 2023 में ये -3.8 फीसदी पर रही थी. आज आया थोक महंगाई दर का डेटा फरवरी 2023 के बाद से सबसे ज्यादा है.

खाने-पीने के सामान महंगे होने से बढ़ी थोक महंगाई दर

खाने-पीने के सामान खासकर सब्जियों और मैन्यूफैक्चर्ड गुड्स की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते थोक महंगाई दर मई में लगातार तीसरे महीने बढ़कर 2.61 फीसदी हो गई है. थोक मूल्य सूचकांक-होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर अप्रैल में 1.26 फीसदी थी. मई 2023 में यह शून्य से नीचे 3.61 फीसदी रही थी.

रिटेल महंगाई दर घट रही तो थोक महंगाई दर बढ़ने से हैरानी

मई में थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी मई के रिटेल महंगाई दर के आंकड़ों के विपरीत है. इस हफ्ते की शुरुआत में जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में खुदरा महंगाई दर घटकर 4.75 फीसदी पर आ गई है जो एक साल का सबसे निचला स्तर है.

क्यों बढ़ी है थोक महंगाई दर-जानिए मंत्रालय का जवाब

कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “मई 2024 में महंगाई दर बढ़ने की मुख्य वजह खाने-पीने के सामान के दाम, फूड आर्टिकल्स की मैन्यूफैक्चरिंग महंगी, कच्चे पेट्रोलियम और नैचुरल गैस, मिनिरल, ऑयल एंड मैन्यूफैक्चरिंग आदि की कीमतों में बढ़ोतरी रही है.”

खाने-पीने के सामान की महंगाई दर बढ़ी

WPI आंकड़ों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर मई में 9.82 फीसदी बढ़ी है जबकि अप्रैल में यह 7.74 फीसदी थी. मई में सब्जियों की महंगाई दर 32.42 फीसदी रही, जो अप्रैल में 23.60 फीसदी थी. प्याज की महंगाई दर 58.05 फीसदी, जबकि आलू की महंगाई दर 64.05 फीसदी रही. दालों की महंगाई दर मई में 21.95 फीसदी रही.

फ्यूल एंड पावर सेक्टर की महंगाई दर

फ्यूल एंड पावर सेक्टर में महंगाई दर 1.35 फीसदी रही है जो अप्रैल के 1.38 फीसदी से मामूली कम रही है. मैन्यूफैक्चर्ड गुड्स में महंगाई दर 0.78 फीसदी रही, जो अप्रैल में शून्य से नीचे 0.42 फीसदी थी.

RBI रखता है महंगाई दर के आंकड़ों पर नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मॉनिटरी पॉलिसी तैयार करते समय मुख्य रूप से रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखता है. आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में लगातार आठवीं बार ब्याज दर को बरकरार रखने का फैसला किया था.

ICICI Bank: आईसीआईसीआई बैंक के ग्राहकों का फायदा, अब इन कामों के लिए नहीं लगेगा चार्ज

प्राइवेट सेक्टर के सबसे प्रमुख बैंकों में एक आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों को अच्छी खबर सुनाई है. बैंक ने अपनी कई सेवाओं के शुल्क में बदलाव किया है. इससे बैंक के ग्राहकों खास तौर पर उसके क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों को बड़ा लाभ मिलने वाला है और उनकी जेब से होने वाले खर्च में कमी आने वाली है.

क्रेडिट कार्ड रिप्लेस करने पर ज्यादा शुल्क

आईसीआईसीआई बैंक ने बताया है कि उसने कई क्रेडिट कार्ड सेवाओं के शुल्क में बदलाव किया है. ये बदलाव 1 जुलाई 2024 से लागू होने वाले हैं.

इनमें से कुछ बदलाव से ग्राहकों को फायदा होने वाला है, क्योंकि बैंक ने कई चार्ज को समाप्त कर दिया है. दूसरी ओर कुछ सर्विस के चार्ज बढ़ाए भी गए हैं. बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिप्लेसमेंट चार्ज को 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया है.

आईसीआईसीआई बैंक ने अपने क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए जिन शुल्को को 1 जुलाई से समाप्त करने का ऐलान किया है, वे कुछ इस प्रकार हैं:

1: चेक या कैश पिक अप करने पर लगने वाला 100 रुपये का शुल्क
2: चार्ज स्लिप मांगने पर लगने वाला 100 रुपये का शुल्क
3: डायल ए ड्राफ्ट सर्विस पर लगने वाला कम से कम 300 रुपये का शुल्क
4: आउटस्टेशन चेक प्रोसेसिंग फी (कम से कम 100 रुपये या चेक की वैल्सू का 1 पर्सेंट)
5: 3 महीने से पुराने डुप्लिकेट स्टेटमेंट के लिए 100 रुपये का चार्ज

अगले महीने से लागू होंगे बदलाव

आईसीआईसीआई बैंक के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब उसके क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों से ये 5 तरह के चार्ज नहीं वसूल किए जाएंगे. बैंक ने इन 5 सर्विस के लिए चार्ज को डिसकंटीन्यू कर दिया है. ये बदलाव अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 जुलाई 2024 से लागू हो रहे हैं.

लेट पेमेंट पेनल्टी पर भी राहत

आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव लेट पेमेंट पर लगने वाली पेनल्टी को लेकर हुआ है. बैंक का कहना है कि लेट पेमेंट के मामले में ग्राहकों के ऊपर पेनल्टी अब कुल बकाया राशि के हिसाब से नहीं लगेगी.

इसके लिए आउटस्टैंडिंग अमाउंट का कैलकुलेशन संबंधित बिलिंग पीरियड के कुल बकाए में से उस अवधि के दौरान प्राप्त भुगतान को घटाकर किया जाएगा

Stock Market Record: ऐतिहासिक ऊंचाई पर खुला बाजार, सेंसेक्स 77100 के ऊपर, निफ्टी 23480 के पार

भारतीय शेयर बाजार लगातार नए शिखर पर जा रहा है और आज फिर से नए रिकॉर्ड हाई लेवल पर शुरुआत की है. बैंक निफ्टी की तेजी बरकरार है पर ये अपने रिकॉर्ड हाई से चंद अंक दूर है. आईटी स्टॉक्स की लगातार तेजी से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है. सेंसेक्स ने आज 77,100 का स्तर भी पार करके नया इतिहास रच दिया है और निफ्टी 23500 के करीब आ गया है.

बाजार की ऐतिहासिक ऊंचाई पर शुरुआत

भारतीय शेयर बाजार की ऐतिहासिक स्तर पर शुरुआत हुई है और आज बीएसई सेंसेक्स ने 495 अंक या 0.65 फीसदी की उछाल के साथ 77,102.05 पर ओपनिंग दिखाई है. एनएसई निफ्टी 158 अंक या 0.68 फीसदी चढ़कर 23480.95 पर खुला है. सेंसेक्स-निफ्टी का ये रिकॉर्ड हाई लेवल है.

बैंक निफ्टी ने भरा जोश-आईटी स्टॉक्स में रैली जारी

बैंक निफ्टी के 12 में से 10 शेयर उछाल के साथ कारोबार कर रहे हैं और आज ये 50,186 के हाई लेवल तक जा चुका है. फेडरल बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ही केवल गिरावट के लाल दायरे में हैं. आईटी स्टॉक्स की रैली जारी है और ये करीब एक फीसदी ऊपर है. निफ्टी आईटी इंडेक्स के सभी 10 शेयरों में बढ़त का हरा निशान देखा जा रहा है.

मिडकैप इंडेक्स रिकॉर्ड हाई पर

मिडकैप इंडेक्स में रिकॉर्ड ऊंचाई का सिलसिला लगातार जारी है और ये शेयर लंबे समय से बाजार में जोश भर रहे हैं. निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट के 25 शेयरों में से 19 शेयरों में उछाल देखा जा रहा है और 6 स्टॉक्स में गिरावट बनी हुई है.

430 लाख करोड़ रुपये के पार हुआ BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन

BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन देखें तो ये 431.18 लाख करोड़ रुपये पर आ चुका है जो इसका रिकॉर्ड हाई लेवल है. इस तरह पहली बार 430 लाख करोड़ रुपये को पहली बार पार कर लिया है.

सेंसेक्स के शेयरों का अपडेट

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 शेयरों में उछाल देखा जा रहा है और 5 शेयरों में गिरावट देखी जा रही है. टॉप गेनर्स में नेस्ले में 1.34 फीसदी की उछाल देखी जा रही है जबकि विप्रो 1.23 फीसदी ऊपर है. टेक महिंद्रा 1.15 फीसदी और टीसीएस 1.10 फीसदी चढ़े हैं. एचसीएल टेक 1.08 फीसदी बढ़ा है.

निफ्टी के शेयरों की तस्वीर

एनएसई निफ्टी के 50 में से 42 शेयर उछाल के साथ कारोबार कर रहे हैं जबकि 8 शेयरों में गिरावट है. डीवीज लैब 2.84 फीसदी की शानदार बढ़त के साथ टॉप गेनर बना हुआ है. एचडीएफसी लाइफ 2.50 फीसदी ऊपर है और एलटीआई माइंडट्री में 1.81 फीसदी की उछाल है. श्रीराम फाइनेंस और विप्रो में  1.49-1.35 फीसदी की मजबूती है.

प्री-ओपन में ही बाजार का नया रिकॉर्ड

प्री-ओपनिंग में बाजार में बीएसई सेंसेक्स 498 अंक या 0.65 फीसदी चढ़कर 77105 के लेवल पर था. वहीं एनएसई निफ्टी 157.40 अंक या 0.67 फीसदी की तेजी के साथ 23480 पर दिख रहा था.

TRAI: एक से ज्यादा सिम कार्ड रखने पर होगी मुसीबत, ज्यादा ढीली होगी ग्राहकों की जेब

मोबाइल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को आने वाले दिनों में जेब ज्यादा ढीली करने की जरूरत पड़ सकती है. खासकर उन लोगों को ज्यादा नुकसान हो सकता है, जो एक से ज्यादा मोबाइल नंबर रखते हैं. इस संबंध में दूरसंचार नियामक ने एक प्रस्ताव तैयार किया है.

सरकार की संपत्ति हैं मोबाइल नंबर

भारत के दूरसंचार नियामक टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का कहना है कि मोबाइल नंबर्स वास्तव में सरकार की संपत्ति हैं. उन्हें दूरसंचार कंपनियों को सीमित समय के लिए इस्तेमाल के लिए दिया जाता है, जिन्हें कंपनियां ग्राहकों को अलॉट करती हैं. ऐसे में सरकार मोबाइल नंबर देने के बदले कंपनियों से चार्ज वसूल कर सकती है.

नियामक ने यह प्रस्ताव नंबरों के दुरुपयोग को कम करने के लिए तैयार किया है. ट्राई का मानना है कि मोबाइल कंपनियां कम इस्तेमाल होने वाले या लंबे समय तक नहीं इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों को भी बंद नहीं करती हैं, ताकि उनके यूजर बेस पर नकारात्मक असर न हो.

इन गतिविधियों पर लगाम का प्रयास

इसे ऐसे समझ सकते हैं. आज के समय में डुअल सिम कार्ड वाले फोन प्रचलन में हैं. आम तौर पर लगभग हर यूजर के पास एक से अधिक मोबाइल नंबर होते हैं. ज्यादातर लोग दो मोबाइल नंबर रखते हैं.

उनमें से एक का तो खूब इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दूसरा नंबर यूं ही पड़ा रह जाता है. मोबाइल कंपनियां भी जान-बूझकर ऐसे कम इस्तेमाल वाले नंबरों को बंद नहीं करती हैं. अगर वे इन नंबरों को बंद करेंगे तो उनका यूजर बेस कम हो जाएगा. ट्राई इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाना चाहता है.

इन देशों में पहले से व्यवस्था

अपने प्रस्ताव के पक्ष में ट्राई का कहना है कि दुनिया के कई देशों में पहले से ऐसी व्यवस्था लागू है, जहां दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल नंबर या लैंडलाइन नंबर के बदले सरकार को शुल्क का भुगतान करना पड़ता है. ट्राई के अनुसार, उन देशों में ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, बेल्जियम, फिनलैंड, ब्रिटेन, लिथुआनिया, यूनान, हांगकांग, बुल्गारिया, कुवैत, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और डेनमार्क शामिल हैं.

प्रस्ताव मंजूर होने का असर

शुल्क को लेकर ट्राई का कहना है कि सरकार या तो एक बार में फिक्स्ड चार्ज लगा सकती है या सालाना आधार पर रेकरिंग पेमेंट ले सकती है. ट्राई की सिफारिश के हिसाब से सरकार को दूरसंचार कंपनियों से चार्ज वसूल करना है.

हालांकि अगर इस प्रस्ताव पर अमल हुआ तो निश्चित ही दूरसंचार कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डालेंगी. खास तौर पर सेकेंडरी या अल्टरनेट मोबाइल नंबरों के लिए ग्राहकों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.

GST काउसिंल की बैठक 22 जून को, चुनावी झटकों के बाद क्या कम होगा टैक्स का बोझ!

 केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 22 जून 2024 को पहली जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाई गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की ये 53वीं बैठक होगी जो नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी.

नए वित्त वर्ष 2024-25 के पहले दो महीने अप्रैल और मई में जीएसटी कलेक्शन में जोरदार उछाल देखने को मिला है. अप्रैल महीने में जीएसटी कलेक्शन पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया. 

चुनावी मुद्दा बना जीएसटी 

जीएसटी काउंसिल की ये बैठक बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है. क्योंकि हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी अपने दम पर केंद्र में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में नाकाम रही है. सहयोगियों के समर्थन से सरकार चल रही है.

चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने मौजूदा जीएसटी सिस्टम को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा. कांग्रेस ने तो अपने मैनिफेस्टो जीएसटी 2.0 लाने का वादा किया था. चुनावी नुकसान के बाद मोदी सरकार पर भी जीएसटी रेट्स के सरलीकरण के साथ टैक्स का बोझ घटाने का दबाव है.   

2 महीने में 4 लाख करोड़ के करीब GST वसूली

वित्त वर्ष 2024-25 के पहले ही महीने में जीएसटी कलेक्शन पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 2.10 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंचा. 1 जुलाई 2017 से शुरू हुए जीएसटी के दौर में ये पहला मौका था जब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जीएसटी वसूली में सफलता मिली है.

मई महीने में 1.73 लाख करोड़ जीएसटी कलेक्शन रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चुनावी नुकसान के बाद सरकार जीएसटी रेट्स में बदलाव करेगी. जीएसटी रेट्स को तर्कसंगत बनाने को लेकर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना में बनी कमिटी अभी तक अपनी सिफारिश नहीं सौंप पाई है.  

जीएसटी से गरीबों से ज्यादा अमीरों को लाभ 

हाल ही में ब्रोकरेज हाउस एम्बिट कैपिटल ने जीएसटी को लेकर रिसर्च पेपर जारी किया है जिसमें कहा गया है कि जीएसटी रेट को तर्कसंगत (Rationalization) बनाने का ये सही समय है. नेशनल इंस्टीच्युट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के मुताबिक जिन उत्पादों पर जीएसटी छूट दिया जा रहा है उसका बड़ा फायदा कम आय वाले वर्ग से ज्यादा अमीर परिवारों को हो रहा.

गरीबों के कंजम्पशन बास्केट में शामिल आईटम्स में से 20 फीसदी से भी कम आईटम्स पर जीएसटी छूट मिलता है जबकि अमीरों के कंजम्पशन बास्केट के आईटम्स में ज्यादा सामानों पर जीएसटी छूट का प्रावधान मौजूदा समय में है. 

जॉब प्लेसमेंट तो हुआ लेकिन ऑफिस में ज्वाइनिंग का नहीं अता-पता, IT सेक्टर के फ्रेशर्स हुए परेशान

भारत में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाले सेक्टर्स के रूप में जाना जाता है लेकिन फ्रेशर्स के लिए कुछ समय से ऑनबोर्डिंग में देरी की बड़ी समस्या पैदा कर रहा है.

इसका मतलब है कि फ्रेशर्स को कैंपस प्लेसमेंट या अन्य तरीकों से हायर तो कर लिया गया था लेकिन अभी तक उनकी ज्वाइनिंग नहीं हुई है. कुछ मामलों में तो ये शिकायत दो साल से ज्यादा देरी के लिए भी है.

ज्वाइनिंग में देरी के बारे में आई खबर

अंग्रेजी न्यूज पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो सालों में भारत में कम से कम 10,000 फ्रेशर्स को नौकरी का ऑफर गया था लेकिन इन्हें अभी तक आईटी कंपनियों ने दफ्तरों में वर्कफोर्स में शामिल नहीं किया है.

इसके लिए आईटी कर्मचारी संघ नेसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक आईटी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि जिन कैंडिडेट्स को टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, जेन्सर और एलटीआईमाइंडट्री सहित कंपनियों में पोजीशन ऑफर हुई थीं लेकिन अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई है उन्होंने लेबर यूनियन से ऑनबोर्डिंग में देरी के बारे में शिकायत की है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन शिकायतों में टॉप लेवल और मिड लेवल दोनों आईटी कंपनियां शामिल हैं. 

क्या बताया गई है देरी की वजह

रिपोर्ट में कहा गया है कि नए लोगों को शामिल करने में देरी की वजह प्रमुख रूप से नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में कारोबारी अनिश्चितता के कारण है. यहां आर्थिक मंदी के संकेतों ने कस्टमर्स को आईटी खर्चों के बारे में अलर्ट कर दिया था और नई हायरिंग पर भी असर देखा जा रहा है.

तीन प्रमुख आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में है गिरावट

टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी प्रमुख कंपनियों ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही के लिए अपने जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों का ऐलान किया. इन सबने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अपने कुल कर्मचारियों की संख्या में कमी दर्ज की है. कुल मिलाकर तीन मेजर सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्टर्स ने पूरे वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान कर्मचारियों की संख्या में 63,759 की गिरावट दर्ज की है.

Provident Fund: वित्त मंत्रालय ने की मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए GPF के ब्याज दरों की घोषणा, रेट्स में बदलाव नहीं

जनरल प्राविडेंट फंड (GPF) में योगदान करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) को वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 7.1 फीसदी ब्याज मिलेगा. वित्त मंत्रालय ( Finance Ministry) ने नोटिफिकेशन जारी कर ये जानकारी दी है.

वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीपीएफ (General Provident Fund) समेत इस तरह के दूसरे फंड्स पर एक अप्रैल 2024 से लेकर 30 जून 2024 तक की पहली तिमाही में 7.1 फीसदी ब्याज जीपीएफ योगदान पर मिलेगा. 

जीपीएफ पर 7.1 फीसदी ब्याज

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने कहा, ये सूचित किया जाता है कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सब्सक्राइबर्स के जनरल प्राविडेंट फंड समेत दूसरे फंड्स में  कुल योगदान पर 1 अप्रैल 2024 से लेकर 30 जून 2024 तक 7.1 फीसदी ब्याज दिया जाएगा. ये रेट एक अप्रैल 2024 से मान्य होगा. जीपीएफ पर ब्याज दर लगातार इसी लेवल पर बना हुआ है.  

इन फंड्स पर ब्याज दर लागू

वित्त मंत्रालय ने बताया कि जो फंड इससे जुड़े हैं उसमें जनरल प्राविडेंट फंड ( सेंट्रेल सर्विसेज), कंट्रीब्यूटरी प्राविडेंट फंड ( इंडिया), ऑल इंडिया सर्विसेज प्राविडेंट फंड, स्टेट रेलवे प्राविडेंट फंड, जनरल प्राविडेंट फंड (डिफेंस सर्विसेज), इंडियन ऑर्डिनेंस डिपार्टमेंट प्रॉविडेंट फंड, इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्टरीज वर्कमेंस प्राविडेंट फंड, इंडियन नेवल डॉकयार्ड वर्कमेंस प्राविडेंट फंड, डिफेंस सर्विसेज ऑफिसर्स प्राविडेंट फंड, और ऑर्म्ड फोर्सेज पर्सनल प्रॉविडेंट फंड शामिल है.    
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कौन कर सकता है GPF में योगदान

जनरल प्रॉविडेंट फंड वैसे प्रॉविडेंट होते हैं जो केवल भारत सरकार के कर्मचारियों को ऑफर किया जाता है. सरकार का हर कर्मचारी अपने वेतन का कुछ हिस्सा जनरल प्रॉविडेंट फंड में योगदान कर सकता है.

कर्मचारी जब रिटायर होता है उसके जनरल प्राविडेंट फंड खाते में जमा पैसे ब्याज समेत दिया जाता है. वित्त वर्ष के हर तिमाही पर वित्त मंत्रालय जनरल प्रॉविडेंट फंड के ब्याज दरों की समीक्षा करता है जैसे छोटी बचत योजनाओं के ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है.   

GPF और EPF में अंतर

जनरल प्राविडेंट फंड जहां सरकारी कर्मचारियों के लिए है वहीं एम्पॉलय प्राविडेंट फंड (EPF) निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के भविष्य निधि के लिए ईपीएफओ की ओर से चलाया जाने वाला स्कीम है. ईपीएफ में संगठित क्षेत्र के कर्मचारी अपने वेतन में योगदान करते हैं.

जीपीएफ पर जहां केंद्र सरकार 7.1 फीसदी ब्याज दे रही है वहीं ईपीएफ पर 2023-24 के दौरान 8.25 फीसदी ब्याज देने की घोषणा की गई है.